आधुनिक जीवनशैली में नया विश्वास है योग

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मानवीयता के लिये शांति का उपहार है योग…….. शरीर, दिमाग और आत्मा को शुद्ध बनाता है योग……. बीमारियों से बचाता है योग……. आधुनिक जीवनशैली में नया विश्वास है योग…… तनाव और परेशानियों से मुक्ति दिलाता है योग……
योग क्या है? क्या यह सिर्फ एक व्यायाम है? क्या यह एक धर्म, एक दर्शन, एक विचारधारा है?

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भारत योग की परिकल्पना और अभ्यास का जन्मदाता है। योग दस हजार साल से भी अधिक समय से प्रचलन में है। पतंजलि योगदर्शन में भी क्रियायोग शब्द देखने में आता है। यह शब्द, प्रक्रिया और धारणा बौद्ध धर्म,जैन धर्म और हिंदू धर्म में ध्यान प्रक्रिया से सम्बंधित है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक बर्ष 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता दी है।
योग के माध्यम से शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है। तीनों के स्वस्थ रहने से आप स्वयं को स्वस्थ महसूस करते हैं। योग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर जीवन में नव-ऊर्जा का संचार करता है। योगा शरीर को शक्तिशाली एवं लचीला बनाए रखता है साथ ही तनाव से भी छुटकारा दिलाता है जो रोजमर्रा की जिन्दगी के लिए आवश्यक है। इससे आजकल के लाइफस्टाइल के चलते होने वाली कई बीमारियां कंट्रोल हो सकती हैं। सिर्फ यही नहीं, महिलाएं भी इसका फायदा उठा सकती हैं। इससे कई स्त्रीरोगों पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है और इसके कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं हैं। लेकिन, इसे करने से पहले अपने चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

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बुनियादी तौर पर योगा के आठ अंग हैं जिसकी वजह से इसे अष्टंगा योगा कहा जाता है। इनमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्यहारा, धरना, ध्यान और समाधि है। योग बहुत ही लाभकारी है। योग न केवल हमारे दिमाग, मस्तिष्क को ही ताकत पहुंचाता है बल्कि हमारी आत्मा को भी शुद्ध करता है। आज बहुत से लोग मोटापे से परेशान हैं, उनके लिए योग बहुत ही फायदेमंद है। योग के फायदे से आज सब ज्ञात है, जिस वजह से आज योग विदेशों में भी प्रसिद्ध है।
जैसे पतंजलि के योग सूत्र में वर्णित है – स्थिरम सुखम आसनम का अर्थ है की योगासन प्रयास और विश्राम का संतुलन है। हम आसन में आने के लिए प्रयास करते हैं और फिर हम वहीं विश्राम करते हैं। योगासन हमारे जीवन के हर पहलू में संतुलन लाती है। यह हमें प्रयास करने के लिए सिखाता है और फिर समर्पण, परिणाम से मुक्त होने का ज्ञान देता है।
कोनासन , कटिचक्रासन, हस्तपादासन, अर्ध चक्रासन, त्रिकोणासन, वीरभद्रासन, पसारिता पादोत्तनासन
वृक्षासन, गरुड़ासन, कुर्सी आसन, शीर्षासन, जानु शीर्षासन, पश्चिमोत्तासन, वसिष्ठासन, अधो मुख श्वानासन, मकर अधो मुख श्वानासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, तितली आसन, कमल आसन, पद्मासना, उष्ट्रासन, शिशु आसन, धनुरासन, भुजंगासन, नौकासन, मत्स्यासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन
विष्णुआसन, शवासन
आसन, मुद्रा और प्राणायाम जैसे तरीक़ों से दिल, दिमाग़, गुर्दा, नसों, लीवर और हर अंग को तंदरुस्त रखा जाता है। उसूलन इन्हें अपनाने से शरीर में बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ जाती है।
बीमारियांे और तनाव का साथ छोडिये
आइये योग से नाता जोडिये……

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